सुचना के बाढ भा एकर नाकारात्मक असर
कबो कबो बुझाला कि आजु के मिडिया के कारण सुचना आ जानकारी के बाढ आ गइल बा जवन हमनी के डुबा भि सकता । अब रउवा कहेम सुचना त निमन बात बा, त हमनिके कइसे डुबाई ? बाकिर हम इ बात महसूस कइले बानी कि जरूरत से बहुत जादा सुचना हमनी के उलझा भि सकता भा डुबा भि सकता । आजकल के सूचना प्रद्योगिकी के जमाना मे जादा जानकारी से परेशानी भि हो रहल बा । खास कर के बर्षो से रहल आदत, सोँच आ चलन पर अचानक नयाँ आ बिरोधाभाष बात आइला पर उलझन बढ़ जाला।
जइसे कि आर्युर्वेद आ अलोपैथिक इलाज के तरिका के इन्टरनेट पर चल रहल लडाई । कुछ आर्युवेद के ज्ञाता लोग कहेनि कि अंग्रेजी दवाई जड से रोग के ठिक ना कर सकेला। ओकर नाम ह दवाई, उ रोग के ठिक ना करेला बरु दवाके रखेला । दवाके राखल चिज कबो भि फिर के आ सकेला। कुछ आयुर्वेदिक विद्वान कहेलन कि चिनि कैन्सर रोग के प्रमुख कारण ह । त कुछ विद्वान लोग कहेलन कि भान्सा घर से तिन गो उजर रङ्ग के चिज - मैदा, चिनी आ नुन हटा देम त स्वास्थ्य हमेसा ठिक रही। नुन के जगह सेंधा नुन, मैदा के जगह पर आँटा, भा चिनी के जगह पर मिठ्ठा प्रयोग करेके चाही। कुछ विद्वान लोग कहेलन कि हमनी के घर से अलमुनियम के बरतन हमेसा खातिर हटा देवे के चाँहि आ माटी के बर्तन मे खाना पकावे के आ खाएके चाँही। कुछ विद्वान कहेलन कि हर दिन सुबहमे सुसुम (हल्का गरम) पानी ब्रस आ कुल्ला करे से पहिलही पिएके चाहीँ, त फेर कुछ विद्वान कहेलन के सबेरे सबेरे नारियल के पानी पिएके चाँही । कुछ विद्धान के अनुसार टुयपेष्ट के प्रयोग ना करेके चाँही । टुथपेष्ट मे क्यान्सर होए बाला तत्व मिलाएल रहेला । इन्टरनेट मे खोजेंके आ देखेके सल्लाह देवेलन । आ जब इ बात इन्टरनेट पर हम खोज कईनि त मिलल कि "सब टुथपेष्ट मे इ सभे तत्व ना रहेला । फिर भि अच्छा से पढ के समझके टुथपेष्ट खरिदेके चाँही ।"
कवनो विद्वान कहेलन कि बोखार लगला पर सुसुम पानी मे कम से कम आधा घंटा ठेहुन तक पैर डुबइला के बाद बोखार अपने आप ठिक हो जाई । आधा घण्टा से पहिले पानी ठन्ढा होयला पर कुछ ठण्ढा पानी हटा देवे के आ कुछ पानी सुसुम करके थपे के । सिटामोल ना खाएके चाँही । जादा सिटामोल खएला से किडनी खराब होला । एगो अइसन बात पता चलल जे काजु, पिस्ता आ बादाम जइसन चिजके कबो नखाएके । जे यि सुझाव देलन उनकर कहनाम रहे जे कि "कवनो फलके बिज खाइला से का होई ? अमेरिका मे जादा काजुके उत्पादन होला । ओही से उ लोग हल्ला फैला देलक कि ओहमे भरपुर पोषण तत्व रहेला आ अरबो रुपया के काजु बिक्री करेला । काजु पिस्ता त बिजे नु ह ?"
प्रमुख ट्रेन्डिङ्ग आर्युवेद के डाक्टर मे बाबा रामदेव, राजिव दिक्षित, आचार्य मनिश, डा. विश्वरूप राय चौधरी आदि बाडन । एगो डाक्टर साहेब बतवलन जे दुध दही ना खाएके चाहीं बरू हो सके त नारियल के दही जमा के खाएके चाही । पहिल बार सुननी जे दुध से किडनि खराब हो सकेला । दुध मात्र बच्चा के खातिर उपयुक्त होखेला २ /३ बरिस के उमर के वाद दुध ना पिएके चाहीँ । एगो बिद्वान कहनि जे बिना तेल के सब्जी खाएके चाहिँ । उनकर बिना तेल के मुर्गाके मासु पकावत भिडियो युटुब पर मिल जाई । कुछ बिद्वान के हिसाबसे ध्यु मे खाना पाकाएल ठिक बा, त कुछ बिद्वान के हिसाब से पहिलेके लोग कडा शारीरिक परिश्रम करईत रहलन ह, त वो लोग के घ्यू पचावेके क्षमता रहे, अब ध्यू ना खाए के चाहिँ ।
विश्वरूप राय चौधरी के भिडियो मे देखनि जे हमनिके शरिरके के तौल के गुणा ५ ग्राम गाजर,मुरई, खिरा, टमाटर, चुकुन्दर, (सलाद) आ सेव,सन्तोला, केरा जइसम फल (बिना दबाई के, पुर्ण प्राकृतिक रूप से उब्जाएल भा मौसम अनुसार के फल भा सलाद) (बेमौसमी ना होखेके चाँही) आदि खाके ओकर बाद बाँकी खाली पेट घर के शुद्ध खाना से भरेके चाहि। जइसे ७० किलो के आदमी के एगो थाली मे ३५० ग्राम कच्चा सलाद आ दोसर थाली मे घरमे पकावल खाना खाएला से बहुत बड़का बिमारी सब खुदही ठिक होजाले। एगो विद्वन के कहनाम रहे जे मुरई रातले काटके पानी मे डुबा के राखेके आ दोसर दिन पानी फेक देवे के तब धो के खइला से बहुत अच्छा होला।
कुछ आर्युवेद के डाक्टर कोरोना के भैक्सीन के कारण मृत्यु संख्या के बढेके आरोप लगावेलन । कुछ लोग कहेलन कि एलोपैथिक डाक्टर आपन कमाए खाए खातिर सुगर बि . पि के रोग के कबो पुरा ठिक ना होखेवाला रोग बतावेलन जबकी आयुर्वेद के अनुसार यि पुरा ठीक हो सकेला । बहुत लोग के महसूस हो रहलबा जे एलोपैथिक डाक्टर अनावश्यक लैब टेस्ट खुन, पेशाब चेक कराके, चाहे अपरेसन कर के जादा पैसा के चक्कर मे रहेला । अनावश्यक अपरेसन भि कर देवेला ताकी जादा पैसा मिले । अब चिकित्सा सेवा ना रह गइल बा, ई एगो व्यपार हो गइल बा । सबसे जादा अनावश्यक अपरेसन बच्चा के जनम के बेर होखेला । माई के पेट के अप्रेसन कर के बच्चा के जनम होखेला । आ उपर से बच्चा के जनम होते ही डिब्बा बाला दुध पिया देवेला । जबकी उहे एलोपैथिक डाक्टर भि अन्तरवार्ता मे कहेला की माई के पहिल गाढा दुध बच्चा खातिर अमृत समान होला । दुध के भि व्यापार करे बाला डाक्टर पापी ही ना, अपराधि भि ह । ई एगो चिन्ता के बात बा ।
कोरोना ठिक हो सकेला कहके बाबा रामदेव के आयुर्वेदिक दवाई पर भारत के सर्वोच्च अदालत मे मुद्दा दायर भि भइल आ न्यायाधिश दोवारा अईइसन ना करे के चेतावनि देहल समाचार पढेके मिलल । गाई के मुत्र से रोग ठिक होय बाला बात बहुत लोग मानेला बाकिर विज्ञान आ एलोपैथिक डक्टर इ बात के खारिज कर देवेला । गउ मुत्र के लैब परिक्षण करके देखेमे का जाइता ? हम इन्टरनेट पर भि सवाल पुछली त जवाफ आइल जे गउमुत्र के ठोस परिक्षण अभि हो रहल बा। आ यि बात ४/५बरिष पहिले भि पुछले रही त इहे जबाब आइल रहे। एगो हिन्दी फिल्मी दुनिया के अभिनेता परेश रावल के अन्तरर्वाता मे सुनली कि सुतके सबेरे उठते सबसे पहिले आपन पेशाब पिला से शरिर बहुत स्वस्थ्य रहेला ।
कबो त बुझाला कि आर्युवेदिक तरिका भि महंगा आ कठिन बा । जइसे अलमुनिम के बर्तन के जगहपर माटी , शुद्ध फलफुल आ सलाद गरिब आ मध्यम वर्ग के वस के बात नइखे,
कबो कबो बुझाला कि आजु के मिडिया के कारण सुचना आ जानकारी के बाढ आ गइल बा जवन हमनी के डुबा भि सकता । अब रउवा कहेम सुचना त निमन बात बा, त हमनिके कइसे डुबाई ? बाकिर हम इ बात महसूस कइले बानी कि जरूरत से बहुत जादा सुचना हमनी के उलझा भि सकता भा डुबा भि सकता । आजकल के सूचना प्रद्योगिकी के जमाना मे जादा जानकारी से परेशानी भि हो रहल बा । खास कर के बर्षो से रहल आदत, सोँच आ चलन पर अचानक नयाँ आ बिरोधाभाष बात आइला पर उलझन बढ़ जाला।
जइसे कि आर्युर्वेद आ अलोपैथिक इलाज के तरिका के इन्टरनेट पर चल रहल लडाई । कुछ आर्युवेद के ज्ञाता लोग कहेनि कि अंग्रेजी दवाई जड से रोग के ठिक ना कर सकेला। ओकर नाम ह दवाई, उ रोग के ठिक ना करेला बरु दवाके रखेला । दवाके राखल चिज कबो भि फिर के आ सकेला। कुछ आयुर्वेदिक विद्वान कहेलन कि चिनि कैन्सर रोग के प्रमुख कारण ह । त कुछ विद्वान लोग कहेलन कि भान्सा घर से तिन गो उजर रङ्ग के चिज - मैदा, चिनी आ नुन हटा देम त स्वास्थ्य हमेसा ठिक रही। नुन के जगह सेंधा नुन, मैदा के जगह पर आँटा, भा चिनी के जगह पर मिठ्ठा प्रयोग करेके चाही। कुछ विद्वान लोग कहेलन कि हमनी के घर से अलमुनियम के बरतन हमेसा खातिर हटा देवे के चाँहि आ माटी के बर्तन मे खाना पकावे के आ खाएके चाँही। कुछ विद्वान कहेलन कि हर दिन सुबहमे सुसुम (हल्का गरम) पानी ब्रस आ कुल्ला करे से पहिलही पिएके चाहीँ, त फेर कुछ विद्वान कहेलन के सबेरे सबेरे नारियल के पानी पिएके चाँही । कुछ विद्धान के अनुसार टुयपेष्ट के प्रयोग ना करेके चाँही । टुथपेष्ट मे क्यान्सर होए बाला तत्व मिलाएल रहेला । इन्टरनेट मे खोजेंके आ देखेके सल्लाह देवेलन । आ जब इ बात इन्टरनेट पर हम खोज कईनि त मिलल कि "सब टुथपेष्ट मे इ सभे तत्व ना रहेला । फिर भि अच्छा से पढ के समझके टुथपेष्ट खरिदेके चाँही ।"
कवनो विद्वान कहेलन कि बोखार लगला पर सुसुम पानी मे कम से कम आधा घंटा ठेहुन तक पैर डुबइला के बाद बोखार अपने आप ठिक हो जाई । आधा घण्टा से पहिले पानी ठन्ढा होयला पर कुछ ठण्ढा पानी हटा देवे के आ कुछ पानी सुसुम करके थपे के । सिटामोल ना खाएके चाँही । जादा सिटामोल खएला से किडनी खराब होला । एगो अइसन बात पता चलल जे काजु, पिस्ता आ बादाम जइसन चिजके कबो नखाएके । जे यि सुझाव देलन उनकर कहनाम रहे जे कि "कवनो फलके बिज खाइला से का होई ? अमेरिका मे जादा काजुके उत्पादन होला । ओही से उ लोग हल्ला फैला देलक कि ओहमे भरपुर पोषण तत्व रहेला आ अरबो रुपया के काजु बिक्री करेला । काजु पिस्ता त बिजे नु ह ?"
प्रमुख ट्रेन्डिङ्ग आर्युवेद के डाक्टर मे बाबा रामदेव, राजिव दिक्षित, आचार्य मनिश, डा. विश्वरूप राय चौधरी आदि बाडन । एगो डाक्टर साहेब बतवलन जे दुध दही ना खाएके चाहीं बरू हो सके त नारियल के दही जमा के खाएके चाही । पहिल बार सुननी जे दुध से किडनि खराब हो सकेला । दुध मात्र बच्चा के खातिर उपयुक्त होखेला २ /३ बरिस के उमर के वाद दुध ना पिएके चाहीँ । एगो बिद्वान कहनि जे बिना तेल के सब्जी खाएके चाहिँ । उनकर बिना तेल के मुर्गाके मासु पकावत भिडियो युटुब पर मिल जाई । कुछ बिद्वान के हिसाबसे ध्यु मे खाना पाकाएल ठिक बा, त कुछ बिद्वान के हिसाब से पहिलेके लोग कडा शारीरिक परिश्रम करईत रहलन ह, त वो लोग के घ्यू पचावेके क्षमता रहे, अब ध्यू ना खाए के चाहिँ ।
विश्वरूप राय चौधरी के भिडियो मे देखनि जे हमनिके शरिरके के तौल के गुणा ५ ग्राम गाजर,मुरई, खिरा, टमाटर, चुकुन्दर, (सलाद) आ सेव,सन्तोला, केरा जइसम फल (बिना दबाई के, पुर्ण प्राकृतिक रूप से उब्जाएल भा मौसम अनुसार के फल भा सलाद) (बेमौसमी ना होखेके चाँही) आदि खाके ओकर बाद बाँकी खाली पेट घर के शुद्ध खाना से भरेके चाहि। जइसे ७० किलो के आदमी के एगो थाली मे ३५० ग्राम कच्चा सलाद आ दोसर थाली मे घरमे पकावल खाना खाएला से बहुत बड़का बिमारी सब खुदही ठिक होजाले। एगो विद्वन के कहनाम रहे जे मुरई रातले काटके पानी मे डुबा के राखेके आ दोसर दिन पानी फेक देवे के तब धो के खइला से बहुत अच्छा होला।
कुछ आर्युवेद के डाक्टर कोरोना के भैक्सीन के कारण मृत्यु संख्या के बढेके आरोप लगावेलन । कुछ लोग कहेलन कि एलोपैथिक डाक्टर आपन कमाए खाए खातिर सुगर बि . पि के रोग के कबो पुरा ठिक ना होखेवाला रोग बतावेलन जबकी आयुर्वेद के अनुसार यि पुरा ठीक हो सकेला । बहुत लोग के महसूस हो रहलबा जे एलोपैथिक डाक्टर अनावश्यक लैब टेस्ट खुन, पेशाब चेक कराके, चाहे अपरेसन कर के जादा पैसा के चक्कर मे रहेला । अनावश्यक अपरेसन भि कर देवेला ताकी जादा पैसा मिले । अब चिकित्सा सेवा ना रह गइल बा, ई एगो व्यपार हो गइल बा । सबसे जादा अनावश्यक अपरेसन बच्चा के जनम के बेर होखेला । माई के पेट के अप्रेसन कर के बच्चा के जनम होखेला । आ उपर से बच्चा के जनम होते ही डिब्बा बाला दुध पिया देवेला । जबकी उहे एलोपैथिक डाक्टर भि अन्तरवार्ता मे कहेला की माई के पहिल गाढा दुध बच्चा खातिर अमृत समान होला । दुध के भि व्यापार करे बाला डाक्टर पापी ही ना, अपराधि भि ह । ई एगो चिन्ता के बात बा ।
कोरोना ठिक हो सकेला कहके बाबा रामदेव के आयुर्वेदिक दवाई पर भारत के सर्वोच्च अदालत मे मुद्दा दायर भि भइल आ न्यायाधिश दोवारा अईइसन ना करे के चेतावनि देहल समाचार पढेके मिलल । गाई के मुत्र से रोग ठिक होय बाला बात बहुत लोग मानेला बाकिर विज्ञान आ एलोपैथिक डक्टर इ बात के खारिज कर देवेला । गउ मुत्र के लैब परिक्षण करके देखेमे का जाइता ? हम इन्टरनेट पर भि सवाल पुछली त जवाफ आइल जे गउमुत्र के ठोस परिक्षण अभि हो रहल बा। आ यि बात ४/५बरिष पहिले भि पुछले रही त इहे जबाब आइल रहे। एगो हिन्दी फिल्मी दुनिया के अभिनेता परेश रावल के अन्तरर्वाता मे सुनली कि सुतके सबेरे उठते सबसे पहिले आपन पेशाब पिला से शरिर बहुत स्वस्थ्य रहेला ।
कबो त बुझाला कि आर्युवेदिक तरिका भि महंगा आ कठिन बा । जइसे अलमुनिम के बर्तन के जगहपर माटी , शुद्ध फलफुल आ सलाद गरिब आ मध्यम वर्ग के वस के बात नइखे,
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